निरंकुश साहित्य

Saturday, 10 March 2018

ऋतुराज का स्वागत

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पीली धानी रंग में सजी उत्सव का रंग लिए आनंद मस्ती चरमोत्कर्ष पर सकल मानव की वृत्तियों को सुरुचिपूर्ण सुखद संयत कल्याणकारी बनाने ...

ऋतुराज का स्वागत

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पीली धानी रंग में सजी उत्सव का रंग लिए आनंद मस्ती चरमोत्कर्ष पर सकल मानव की वृत्तियों को सुरुचिपूर्ण सुखद संयत कल्याणकारी बनाने ...

विश्व चित्रांश परिवार

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चित्रगुप्त के वंशज हम लिखते इतिहास ! विश्व चित्रांश परिवार का शुभ दिन है आज !! शुभ दिन है आज राष्ट्रीय त्यौहार में! रंगोत्सव का पर्व...

होली में मोबाइल

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होली में रंग गुलाल के बदले मोबाइल लिए कवि निरंकुश निकले चित्रांश परिवार में आए मोबाइल की स्थिति सुनाए ... .. *अब सभी सम्वेदनाएँ      ...

किसी खाश के लिए

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तेरी ज़ुल्फ़ें हैं या बरसात की काली घटाएं तेरी पेशानी है या बर्फीली चट्टानें तेरे अबरू हैं या तेज़ कटारी या खंजर तेरी आँखें हैं या कोई ...
2 comments:

भारतीय जवान

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इतना बदलाव कहाँ गई देश भक्ति क्या क्षीण हो जाए देश रक्षार्थ जवानों की शक्ति घिन आती है ऐसे सोच पर सिनेमा से प्रेम सिनेमा हॉल में उमड़...

कलम आज उनकी जय बोल.....

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मेरे मित्र ने कहा अपनों के अलावे कभी किसी दुःखी रोगी का दर्द अपनी सेल्फी में क्लिक कर कैद कर लेना।      ईश्वर भी      लाइक करने से...
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कामेश्वर श्रीवास्तव निरंकुश
समाज की यथार्थ भूमि पर संस्कार और विवेक की कशमकश ही कविता का विषय होती है.भागते-दौड़ते सन्दर्भ, जीवन की विसंगतियों और समय की आपाधापी से उत्पन्न स्थितियों के खटते-मीठे अनुभव ही मस्तिष्क में घनीभूत हो कर हृदय से होते हुए. कलम की नोक से छलक पड़ते हैं. कविता मेरी स्वाभाविक अभिव्यक्ति, संकल्प है और विश्वास.व्यस्तता मेरी नियति है. इसी व्यस्तता के मध्य शब्दों के झरने फूट पड़ते हैं. शब्द झरनों के चिरंतन स्पर्श से ऊर्जाविंत हो जाता हूँ......
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