Thursday, 31 October 2013

श्रद्धांजलि राजेन्द्र यादव

'हंस' को अमृत रूपी दूध पिलानेवाला 
हिंदी साहित्य का चितेरा 
सारे बंधनों को तोड़ कर 
सदा के लिए चला गया। 
हिंदी साहित्याकाश के देदीप्यमान  नक्षत्रो में 
स्थायी स्थान उसने बना लिया।
हिंदी के वृक्ष पर काँव काँव कर रहे कौवों में से
अब प्रेमचंद्र के 'हंस' को 
पुनर्जीवित करने वाले की कमी को कोन भर पाएगा।
तुम तो चले गए 
सदा के लिए मौन हो गए, परन्तु 
'प्रेत बोलते हैं'
'सारा आकाश' विद्यमान है 
'अनदेखे अनजान पुल' पर 
'शह और सात प्रमुख उपन्यास' संग 
'एक इंच मुस्कान' दृष्टव्य है। 
हिंदी साहित्य में
नयी कहानी की शुरुवात करनेवाले 
महामनीषी !
साहित्यकार !!
राजेंद्र यादव!!!
श्रद्धा-सुमन अर्पित 
शत् शत् नमन 

Sunday, 14 July 2013

माँ की तलाश


वह नन्हा बालक
माँ की थपकियाँ
ममत्व  भरी निगाहें
कोमल मृदु स्पर्श
आशा भरी लालसा  से
स्वयं को धन्य समझकर
धीरे-धीरे अपनी आँखें  मुदते
न जाने कब सो गया ।

रात को अचानक
एकाएक जागा
बीच  नींद में
और  पाया स्वयं को
अन्य लोगों के बीच सोते
निहारा उसने
चारों ओर
सोए  लोगों को
परिचित चिन्हों को
सभी  चेहरे  जाने-पहचाने
सभी चिन्ह प्रतिदिन देखते
किन्तु नहीं कर पाए  आश्वस्त
उस बालक को
पुनः सोने के लिए  ।

वह ढूँढने लगा
माँ को
फिर से आश्वस्त होकर
सोने के लिए
अंत में रोने लगा
माँ के साथ होने के खातिर
वह चाहता था
माँ का मृदुल स्पर्श
ममता भरी निगाहें
प्यार की दुलार की
मादक थपकियाँ
कौंध गया था
अनेक बार
उसके मन में
असुरक्षा का भाव ।

वह था बेचैन
न सो पाया
परिचित चेहरों  के बीच
माँ की तालाश में
माँ के आभाव में ।



























Thursday, 20 June 2013

प्रश्न



विश्व मे
सबसे खुश देश : कोलंबिया
सबसे शिक्षित  देश :कनाडा
सबसे अमीर देश : क़तर
सबसे शांत और साफ देश : आइसलैंड
सबसे अच्छा देश महिलाओं के लिए : न्यूजीलैंड
कहा जाता है
तब भारत किस श्रेणी में आता है ?
शिक्षक ने छात्रों से पूछा -

एक छात्र ने जवाब दिया
जब से भारत इंडिया बन गया है
यहाँ की खुशियाँ छिन गईं
सुन्दरता कास्मेटिक वस्तुओं के सेवन से धुमिल हुई
शिक्षा का स्तर नैतिकता में गिरा है तथा
कागजों पर बढ़ा है
विश्व में शांति का सन्देश देनेवाला भारत
हो गया अशांत
सोने की चिड़िया कहा जाने वाला देश अभाव-ग्रस्त
महिलाओं पर प्रतिदिन लगता है ग्रहण
जबसे पाश्चात्य सभ्यता अपनाया है
रिश्वतखोरी कालाबाजारी और भ्रष्टाचार में
सर्वोत्तम अंक पाया है
इसीमे नाम कमाया है ।


अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस



मै :                       नवजात शिशु
नाम :                    कुछ भी नहीं
उम्र :                     दो महिना
जन्म स्थान :          अज्ञात
कद :                     साढ़े छप्पन सेंटीमीटर
शिक्षा :                   अक्षरहीन
शौक :                    माँ की गोद में रहना
इच्छा :                  माँ के स्तन का दूध पीना
काम :                    संघर्षमय जीवन जीना
माता पिता का नाम : पता नहीं
क्यों :                     वे  नहीं चाहते सार्वजनिक करना
                            माँ नहीं चाहती मातृत्व सुख
                            मै नहीं हूँ पाप का परिणाम
                             पिता सामने आने में असमर्थ
                             वे नहीं चाहते मेरा भरण पोषण
                             किसी अन्य ने मुझे अपनाया है
                             अपनी गोद में सुलाया है
                             वे  चाहते हैं मै दुनिया देखूँ
                             हवा मुझे छुवे
                             सूर्य की ऊष्मा मुझे रोग रहित करे
                             सृष्टी रचयिता मुझे बचाएं
                             चाँद से मेरा भी परिचय कराएँ
                             और क्या बताऊँ
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस झूठलाता है
समाज का खोखलापन सामने आता है
दबी हुई किलकारी किसे सुनाऊ
मेरी रोने की आवाज कितनी बार दुहराऊ
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस क्या यह सुन पाएगा
मेरे जैसे का गुण गाएगा
नहीं नहीं कभी नहीं ।
          

Monday, 17 June 2013

डिजिटल संस्कृति


अब नहीं रहा
महज डिलिवरी का माध्यम
सभी पढ़े लिखे इसमे जुटे हैं
इसकी संख्या अब हो गयी है अधिकतम

इसके प्रयोग में युवाओं में
मानसिक रोग तैयार किया है
एक डिजिटल वातावरण में
पूरी मानव मस्तिष्क को जकड़ लिया हैं

डिजिटल संस्कृति
इससे होती है दुर्गति
युवाओं के लिए
बेह्तर  दुनिया के बजाये
तकनीकी हावी की दुनिया में
धकेल रहा है
हर युवा इस तकनीक से खेल रहा है

मानवी दुनिया बन रहा है नर्क
मानव और मशीन के बीच
कम से कम हो रहा है फर्क
आज अधिकांश समय
हम स्क्रीन पर बिताते हैं
सुबह से शाम तक
हाई-फाई गतिविधियों में लगाते हैं

मानवी दुर्गुण
क्रोध घृणा द्वेष हिंसा की प्रवृति
सिखाता है नेट
इंटरनेट और नयी तकनीक के नशे में
डूबता है नेट
यह कोकिन अवशाध के चक्र को देता है इंधन
इससे  त्रस्त होगा जन-जन
इन्टरनेट हमें सनकी बना रहा है
तनाव ग्रस्त मानवी व्यवहार से हटा रहा है

भौतिक और काल्पनिक जगत का साथ
मानव और कंप्यूटर का साथ
पाकिट में की-बोर्ड और रेडियो ट्रांसमीटर
आँखों के सामने कंप्यूटर स्क्रीन
बिगाड़ता है दिन
हम बिस्तर से उठते ही
 ऑनलाइन हो जाते हैं
टेक्स्ट मेसेज के द्वारा
साइबोर्ग बनने पर अघाते हैं ।


आदमी और भ्रष्टाचार



आम आदमी और भ्रष्टाचार
इन दोनों में है गहरा नाता
पहले लोग नेताओं की तस्वीरें
दीवारों पर लगाते थे
उनके आदर्श और चरित्र
भूल नहीं पाते थे
अब बढ़ते भ्रष्टाचार
फैलते व्यभिचार
देखकर अब  जुलूसों में
पुतला दहन के काम आते हैं
दोनों एक दूसरे के
बन गए हैं पहचान
छूट गया है धर्म और ईमान
अधिकांश नेता और सरकारी अधिकारी
चमचे प्रवृतिवाले कर्मचारी
हो गए हैं भ्रष्ट
जनता झेलती है कष्ट
हमारा लोकत्रंत्र
बन गया है भ्रष्टतंत्र
इनसे निबटने के लिए
आम आदमी को सौपनी होगी
कुछ चाबियाँ
जिससे दूर होवे खामियाँ
कानून की समझ जागरुकता
शिक्षा नैतिकता
रक्षा हेतु अस्मिता
तय करनी होगी
दूर करनी होगी
ऊँच -नीच जात -पात
तब होगा देश का कल्याण
इनसे बचाओ भगवान । 

सावन की बूंदें



सावन की बूंदें झर जहर बरसे

रिमझिम बरसा बहुत सुहाती
झूला  झूल कर कजरी गाती
झर = झर झरती फुहार से
गोरी का देह सोने सा चमके।

काले   मेघा  घिर  घिर आए
बरस बरस कर तपिस बुझाए
घटा  देख  वह रोक  न  पाई
मन - मयूर भींग  कर बहके ।

नई   नवेली   राह    निहारे
कहाँ गए तुम प्रियतम  प्यारे
बहती  बयार  काम  जगाती
कैसे  रहूँ  मै  इससे  बचके ।

तीज त्यौहार सावन में आया
हरियाली  है  मन  को  भाया
हरे  रंग  की  घाघरा- चुनरी
हरी चुदियाँ खन खन खनके ।

पेड़   कटे   घन     दूर   हटे
बढ़ते  फ्लैटों  से  छटा  घटे
प्रकृति  रूठ  गई  है  हमसे
जन -मानस हैं भटके भटके ।