Thursday, 20 June 2013

प्रश्न



विश्व मे
सबसे खुश देश : कोलंबिया
सबसे शिक्षित  देश :कनाडा
सबसे अमीर देश : क़तर
सबसे शांत और साफ देश : आइसलैंड
सबसे अच्छा देश महिलाओं के लिए : न्यूजीलैंड
कहा जाता है
तब भारत किस श्रेणी में आता है ?
शिक्षक ने छात्रों से पूछा -

एक छात्र ने जवाब दिया
जब से भारत इंडिया बन गया है
यहाँ की खुशियाँ छिन गईं
सुन्दरता कास्मेटिक वस्तुओं के सेवन से धुमिल हुई
शिक्षा का स्तर नैतिकता में गिरा है तथा
कागजों पर बढ़ा है
विश्व में शांति का सन्देश देनेवाला भारत
हो गया अशांत
सोने की चिड़िया कहा जाने वाला देश अभाव-ग्रस्त
महिलाओं पर प्रतिदिन लगता है ग्रहण
जबसे पाश्चात्य सभ्यता अपनाया है
रिश्वतखोरी कालाबाजारी और भ्रष्टाचार में
सर्वोत्तम अंक पाया है
इसीमे नाम कमाया है ।


अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस



मै :                       नवजात शिशु
नाम :                    कुछ भी नहीं
उम्र :                     दो महिना
जन्म स्थान :          अज्ञात
कद :                     साढ़े छप्पन सेंटीमीटर
शिक्षा :                   अक्षरहीन
शौक :                    माँ की गोद में रहना
इच्छा :                  माँ के स्तन का दूध पीना
काम :                    संघर्षमय जीवन जीना
माता पिता का नाम : पता नहीं
क्यों :                     वे  नहीं चाहते सार्वजनिक करना
                            माँ नहीं चाहती मातृत्व सुख
                            मै नहीं हूँ पाप का परिणाम
                             पिता सामने आने में असमर्थ
                             वे नहीं चाहते मेरा भरण पोषण
                             किसी अन्य ने मुझे अपनाया है
                             अपनी गोद में सुलाया है
                             वे  चाहते हैं मै दुनिया देखूँ
                             हवा मुझे छुवे
                             सूर्य की ऊष्मा मुझे रोग रहित करे
                             सृष्टी रचयिता मुझे बचाएं
                             चाँद से मेरा भी परिचय कराएँ
                             और क्या बताऊँ
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस झूठलाता है
समाज का खोखलापन सामने आता है
दबी हुई किलकारी किसे सुनाऊ
मेरी रोने की आवाज कितनी बार दुहराऊ
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस क्या यह सुन पाएगा
मेरे जैसे का गुण गाएगा
नहीं नहीं कभी नहीं ।
          

Monday, 17 June 2013

डिजिटल संस्कृति


अब नहीं रहा
महज डिलिवरी का माध्यम
सभी पढ़े लिखे इसमे जुटे हैं
इसकी संख्या अब हो गयी है अधिकतम

इसके प्रयोग में युवाओं में
मानसिक रोग तैयार किया है
एक डिजिटल वातावरण में
पूरी मानव मस्तिष्क को जकड़ लिया हैं

डिजिटल संस्कृति
इससे होती है दुर्गति
युवाओं के लिए
बेह्तर  दुनिया के बजाये
तकनीकी हावी की दुनिया में
धकेल रहा है
हर युवा इस तकनीक से खेल रहा है

मानवी दुनिया बन रहा है नर्क
मानव और मशीन के बीच
कम से कम हो रहा है फर्क
आज अधिकांश समय
हम स्क्रीन पर बिताते हैं
सुबह से शाम तक
हाई-फाई गतिविधियों में लगाते हैं

मानवी दुर्गुण
क्रोध घृणा द्वेष हिंसा की प्रवृति
सिखाता है नेट
इंटरनेट और नयी तकनीक के नशे में
डूबता है नेट
यह कोकिन अवशाध के चक्र को देता है इंधन
इससे  त्रस्त होगा जन-जन
इन्टरनेट हमें सनकी बना रहा है
तनाव ग्रस्त मानवी व्यवहार से हटा रहा है

भौतिक और काल्पनिक जगत का साथ
मानव और कंप्यूटर का साथ
पाकिट में की-बोर्ड और रेडियो ट्रांसमीटर
आँखों के सामने कंप्यूटर स्क्रीन
बिगाड़ता है दिन
हम बिस्तर से उठते ही
 ऑनलाइन हो जाते हैं
टेक्स्ट मेसेज के द्वारा
साइबोर्ग बनने पर अघाते हैं ।


आदमी और भ्रष्टाचार



आम आदमी और भ्रष्टाचार
इन दोनों में है गहरा नाता
पहले लोग नेताओं की तस्वीरें
दीवारों पर लगाते थे
उनके आदर्श और चरित्र
भूल नहीं पाते थे
अब बढ़ते भ्रष्टाचार
फैलते व्यभिचार
देखकर अब  जुलूसों में
पुतला दहन के काम आते हैं
दोनों एक दूसरे के
बन गए हैं पहचान
छूट गया है धर्म और ईमान
अधिकांश नेता और सरकारी अधिकारी
चमचे प्रवृतिवाले कर्मचारी
हो गए हैं भ्रष्ट
जनता झेलती है कष्ट
हमारा लोकत्रंत्र
बन गया है भ्रष्टतंत्र
इनसे निबटने के लिए
आम आदमी को सौपनी होगी
कुछ चाबियाँ
जिससे दूर होवे खामियाँ
कानून की समझ जागरुकता
शिक्षा नैतिकता
रक्षा हेतु अस्मिता
तय करनी होगी
दूर करनी होगी
ऊँच -नीच जात -पात
तब होगा देश का कल्याण
इनसे बचाओ भगवान । 

सावन की बूंदें



सावन की बूंदें झर जहर बरसे

रिमझिम बरसा बहुत सुहाती
झूला  झूल कर कजरी गाती
झर = झर झरती फुहार से
गोरी का देह सोने सा चमके।

काले   मेघा  घिर  घिर आए
बरस बरस कर तपिस बुझाए
घटा  देख  वह रोक  न  पाई
मन - मयूर भींग  कर बहके ।

नई   नवेली   राह    निहारे
कहाँ गए तुम प्रियतम  प्यारे
बहती  बयार  काम  जगाती
कैसे  रहूँ  मै  इससे  बचके ।

तीज त्यौहार सावन में आया
हरियाली  है  मन  को  भाया
हरे  रंग  की  घाघरा- चुनरी
हरी चुदियाँ खन खन खनके ।

पेड़   कटे   घन     दूर   हटे
बढ़ते  फ्लैटों  से  छटा  घटे
प्रकृति  रूठ  गई  है  हमसे
जन -मानस हैं भटके भटके ।
 

मचलते ख्वाब

मचलते ख्वाब 

वीणा के तार को छेड़ते 
बीना श्रीवास्तव के " आस का पंछी "
" यादों की लाठी " थामे 
" नया आयाम " गढ़ता है 
प्रश्न भी करता है 
" कहाँ गया "
"आँखों में पलता ख्वाब "
" हिंदुस्तानी का मन "
"परीक्षा " में उत्तीर्ण होता है 
और "वृक्षों से जीवन " का सीख देता हुआ 
"दया नहीं  स्वाभिमान दो "
यह कामना कर 
"प्यार की फसल " उगाने के लिए 
"आँखों में तैरते बादल" को 
"प्यार का"दामन" थामकर
"मुठ्ठी में चाँद" कसता है 
और तब" दस्तक" देता है 
ताकि "भरी रहे उमंगें"
इन्हें " संतोष" है 
"आँखों की चमक " दर्शाती है 
"अमावास" की काली रात में भी
"जरुरी है नया पथ "{
प्रेम का ..।   
 

Sunday, 16 June 2013

आमंत्रण



फैली पहाड़ियों की श्रृंखला से 
दूर दूर तक फैले जंगलों से 
हरे भरे पत्तों की हलचल से 
प्रवाहित होती नदियों की कल-कल से 
दसों दिशाओं से 
मन्द-मन्द बहती हवाओं से 
प्रतिदिन मिलता है 
आमंत्रण 

आमंत्रण 
पुरातन संस्कृति का 
मेल-जोल की संगति का 
जनजातियों की सभ्यता का 
आदिवाशियों की नम्रता का 
आतिथ्य सत्कार का 
मृदुल स्नेहिल प्यार का 
मांदर की थाप पर थिरकते पाँव का 
थके हारे वृछ की छाव का 
गोदना दगे चेहरे पर मुस्कान का 
छल कपट से दूर सम्मान का 
सदैव मिलता रहा है 
आमंत्रण 

साहित्यकारों को 
कलाकारों को 
भक्तों को 
संतो को 
सैलानियों को 
तीर्थ -यात्रियों को 
शोध कर्ताओं को 
युगों से झारखंडी 
जोहार करते हुए 
दे रहे हैं आगमन का 
आमंत्रण।