Friday, 31 May 2013

चुनाव



चुनाव सर पैर है 
सब पार्टियाँ 
एक दुसरे पर 
कर रही हैं तीखे प्रहार 
अशोभनीय बयानबाज़ी 
अमानवीय करतूतों का 
हो रहा है प्रचार
चन्द फायदे के लिए किया जाएगा 
नए प्रत्याशी को शामिल 
पहले वे रहेंगे हिल-मिल 
फिर पार्टी की होगी फज़ीहत 
इतिहास लिखेगा हक़ीकत 
चुनाव से पहले  हर दल में 
तमाम पैराशूटर आते हैं 
टिकट भी हथियाते हैं 
जीत गए तो पार्टी गले लगाती हैं 
हार गए तो दुत्कारने से 
बाज़ नहीं आती हैं 
यह समय चिन्तन-मनन का हैं 
हार जीत या तत्कालिक फायदा 
पार्टी के सिद्धान्तों और नीतियों से 
सामंजस्य कैसे बिठा सकता हैं 
राजनीति को साफ़ कैसे रहने दे सकता है।

Wednesday, 29 May 2013

चुप्पी तोड़ो दोस्त



बताओ दोस्त 
आखिर क्या निकला 
उसके साथ घटे 
दुर्दिन शर्मनाक के क्षण का परिणाम 

हम प्रगति पर हैं 
बहुत जल्द पहुंचाए 
उस घटना को 
पूर्ण विवरण के साथ 
आकाशवाणी 
दूरदर्शन 
विभिन्न चैनलों के अलावा 
अनेक समाचार पत्रों में 
सुर्ख़ियों के साथ 
प्रसारित और प्रकाशित कर 

धरनाएं  
नारे 
पोस्टर 
जुलूस 
नारी के सवेदना को समेट कर 
निकाले गए प्रशासन द्वारा 
शांति बनाये रखने के लिए 
बरसी लाठियाँ 
फेंके गए 
छोड़े गए 
तेज पानी की बौछारें उनपर 

समझे न दोस्त 
क्या हुआ 
इन सबका परिणाम 
उस घटना के घटे 
दिन सप्ताह महीना वर्ष भी बीत गए 

क्या दोस्त 
फिर टाँय टाँय फिस्स ..
क्या अब भी लोग नहीं समझ पाए 
औरत एक निर्वाह है 
एक संस्कृति और सभ्यता है 
एक उपदेश है 
एक सदाचार है 
एक कुलीन दीपक है 
जो तिल तिल जलती है 
अंतिम साँस तक 
हादसों से टूटकर भी 
हौसले बुलन्द रखती है औरत 
आत्मविश्वास से लबरेज़ अपना जीवन 
अपने बलबूते पर जीती है औरत 

कभी कभी यह लगता है 
मेरे दोस्त 
ये बातें पुस्तकों में कैद हो गई हैं  
दूसरी पुस्तकें 
हवा में फडफडाई है 
जिसमे अंकित है 
नारी की अस्मिता पर लगे दाग 
बलात्कारियों की मनमानी 
हैवानियत को जकड़े 
कामुक स्थितियां 
बिगड़ती परिस्थितियां 
नारी की छटपटाती जिजीविषा 
जिसे सब देखते हैं 
सब पढ़ते हैं 
चाहकर भी नही बदल सकते 
घृणित घटनावों को 

तुम्हारे पास इसका हल है 
तो बताओ दोस्त 
चुप्पी तोड़ो दोस्त .   
 

Tuesday, 9 April 2013

सुनहरे भविष्य के लिए


मिट्टी के गिलावे से
जमा किये गए
टूटे-फूटे ईंट को जोड़कर
खड़ा किया उसने
अपना आशियाना
रहने के लिए लगाया उसने
कनस्तर टिन का छत
और लकड़ी का दरवाजा
बहुत मुश्किल से
वर्षों बाद जमा किया
कुछ सिक्के औ' रुपए
दुर्दिन जानलेवा बीमारी
आतंकित भूख से सामना करने के लिए
कभी-कभी गिनता रहा
उन संचित राशि को 
सारे खिड़कियाँ दरवाजे बंद कर।
खिड़कियाँ और दरवाजे तो बंद हैं
फिर भी खुले हैं
उसके मन में शंकाओं के द्वार
आ रहा है उनमे से झोंका
लूट और धोखे से छिन जाने का
चौबीसों घंटे
अभावों का ऑक्सीजन
लेता वह व्यक्ति
शायद यह नहीं जानता कि
अभावों के साथ साथ
वह जी रहा है
वर्तमान में सुनहरे भविष्य के लिए
जो सपने उसने
मन में संजोकर रखे हैं...



Monday, 8 April 2013

औरत



अँधेरी रात
सड़क के किनारे विशाल भवन
उस विशाल भवन के ठीक नीचे
पीछे तरफ
अँधेरे कोने में
झोपड़ीनुमा घर
मिट्टी के बने चूल्हे की आग से
रौशनी की काम लेती
एक औरत
गिन रही है
अपने बच्चों को खिलाने के लिए
सुबह की बनी हुई रोटियाँ

विशाल भवन के
एक सुसज्जित कमरे में
ए .सी ऑन कर
सारे दरवाजे खिड़कियाँ बंद कर
मध्यम नीली रौशनी में गिन रही है
एक औरत
अपने रखे नोट के गड्डियों को
निहारती है ख़रीदे गए आभूषण औ' जेवरात को
भविष्व में
सौन्दर्य प्रसाधन
आधुनिक वस्त्र
खरीदने के लिए
ताकि दिखा सके स्वयं को
मॉडर्न फैशनेबल एडवांस
भविष्व में होने वाली
किट्टी औ' कॉकटेल पार्टी में।

आदमी



चमचमाती दौड़ती कार
कार की पिछली सीट पर बैठा
सूट पहने चश्मे के भीतर से झांकता है
बन रही शानदार अपार्टमेंट को
एक आदमी।

वर्तमान में लाखों खर्च हुए
पर भविष्य बहुत लाभप्रद होगा
यह विश्वास है
यह भी विश्वास है उसे
वर्तमान में बीमारियाँ झेलता शरीर
हाई ब्लड प्रेशर
ड़ाइबिटिस
ओर्थोराइटिज
हार्ट अटैक से बचाव हेतु
खर्च करने पर भी
भविश्व को शायद ही सुखमय रखे

फटी शर्ट पुराना पैन्ट पहने
टुकडे-तुकडे खपरैल से छाया हुआ छत
मिट्टी के मकान में
प्रशन्नचित मुद्रा में गुज़र करता है
एक दूसरा आदमी

वर्तमान में कमा कर
अपने परिवार के साथ रुखा-सूखा खाकर
खुश है
चिन्तामुक्त है
कठिन परिश्रम करने के बाद भी
उसे किसी बीमारी की दवा का नाम पता नहीं 
थकान होने पर
शरीर टूटने पर
तुलसी का काढ़ा
हल्दी मिश्रित गरम दूध
अदरक गुड काली मिर्च को पीस कर
पकाया गया लेप
सेवन करने पर
चुस्त महसूस करता है
वह दूसरा आदमी।

वह रोग-ग्रसित नहीं है
उसका भविष्य उज्ज़वल  है
शांत मन से
भजन औ' भोजन के कारण।


Sunday, 7 April 2013

दुखद घड़ी


विदा की दुखद घडी में
अश्रुपूरित है नयन 

पुष्प जो तुझपर चढ़ाए
मुरझाकर सब सुख गए
बहती हवा में धीरे धीरे
सारे के सारे उड़ गाए
उसे डंस गया कुंवारापन

तुम तो जीना चाहती थी
अंत में निकले थे शब्द
तेरी आर्त्तनाद सुनकर
पूरा देश भी था स्तब्ध
निरर्थक गया तेरा नमन

धरी की धरी रह गई
दी गई शुभकामनाएं
तेरह दिनीं तक लड़ी थी
सहती रही थी यातनाएं
नारी अस्मिता का हुवा  हवन

कब्र पर बसी यह दिल्ली
फिर कहानी कह गई
हैवानियत दरिंदगी से
एक अबला मर गई
फिर क्यों न हिला था भुवन

इस देश में इस देश के
लोगों के द्वारा लुट गई
लाडो स्वयं को कैसे संभाले
जिंदगी ही रूठ गई
देख रो पड़ा धरती गगन

भूल गए हम नारी की
सृष्टि सेवा औ समर्पण
बनावटी लगाने लगा
शव पर चढ़ाए फूल अर्पण
वह करती रही कष्ट का सहन  






आजाद भारत का काला अध्याय



देश की राजधानी में
कुछ दरिन्दगो ने लिख डाला
सोलह दिसम्बर दो हजार बारह को
काला अध्याय

राजघानी की सड़क पर
सरपट दौड़ती सवारी बस
बस में नारी
दबोच ली गई
उन बहशियों द्वारा
बलात्कार की शिकार
गिड़गिड़ाई
चिल्लाई 
अपनी अस्मत को नहीं बचा पाई
अंततः चलती बस से
दी गई नीचे फेंक
मानवता का यह था अतिरेक
हो गई वह लहू-लुहान
देख कर स्तब्ध था हिन्दुस्तान
मेरा भारत महान
 
वह चाहती थी जीना
किसी ने नहीं सूनी उसकी पुकार
अंततः जीवन से गई हार
तेरह दिनों तक
कष्टप्रद जीवन जिया
काल ने उसे
अठारह दिसम्बर को छीन लिया
इस घटना से हर ओर मचा चित्कार
बलात्कारियों को फाँसी मिले
यही थी पुकार
इसी पर वहाँ रखा गया ध्यान
मेरा भारत महान

घटना के बिरोध में
शांति पूर्वक प्रदर्शन करने पर
क्यों बरसायी जाती हैं लाठियाँ 
क्यों फेका जाता उनपर
पानी का बौछार 
प्रदर्शनकारियो पर
क्यों होता ही प्रहार
नारियों की कब होगी सुरक्षा 

कब कहेगें
आज़ाद भारत है अच्छा
इस पर रखे ध्यान
मेरा भारत महान

हर शहर में
नगर में 
डगर में 
 प्रत्येक दिन घटती है घटनाएँ
खुलेआम छेड़खानियाँ 
सुनती हैं फब्तियाँ
होती है बलात्कार की शिकार
बलात्कारियों की भरमार
क्यों विवश ही सरकार
सियासती गलियारों से क्यों नहीं आता
अनुकूल बयान
मेरा भारत महान

जनता की है यह मांग
बलात्कारियों को फांसी पर झुला दी जाए 
बनाया जाए ऐसा कानून
बहसियों का खत्म हो जुनून
अच्छा होता
कठोर दंड का प्रावधान
उसे सबक सिखाता
उन्हें फांसी पर झुला दिया जाता
इसी पर टिका है
सबो का ध्यान
मेरा भारत महान