Monday, 10 August 2020

राम_मन्दिर



भूमि पूजन
होते देखकर
प्रेम भक्ति से सबकी
आंखे बरस पड़ी
राममय हो गया सम्पूर्ण भारत
रोम रोम में राम समाए
* सियाराम मय * सब जग गाए
मन्दिर की भव्यता
तुलसी के राम की दिव्यता
आदर्श राम का चरित्र
दिव्यता और अनुपम पवित्र स्थल
साकार करने हेतु
भुवनेश्वर जगन्नाथ पुरी से 
आए हैं वी. स्वार्थ पारथी
राम मन्दिर का पूरा खाका लिए
भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न के लिए 
चांदी का सुन्दर सिंहासन
गर्भगृह और कलश स्वर्ण का
राम मन्दिर में पांच मण्डप
161 फुट ऊंचा शिखर
98 फूट तीन इंच 
मन्दिर का शिखर
2012 स्तम्भ
235 फूट प् परिक्रमा पथ
57, 000 वर्ग फुट क्षेत्रफल
कुल शिखर होंगे छह
एक मुख्य और पांच उप शिखर
अद्भुत होगा यह यह
अयोध्या पुरी।
           *****
  © #कामेश्वर_निरंकुश

अयोध्या

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घर हो या बाहर
मठ मंदिर का प्रागंण हो
या फिर सरयू का तट
हर जगह पूरी रात
चहल पहल
5 अगस्त 2020
मंगलवार की रात 
जगी रही अयोध्या
जाे बिस्तर पर थे
करवटें बदलते रहे
जाे मंदिर में थे
राम नाम जपते रहे
पौ फटते ही रिमझिम
फुहारों का स्वागत
सूर्य का प्रकाश 
धरा और कल कल बहती 
सरयू की धारा पर पड़ते ही
राम मन्दिर निर्माण की
492 वर्ष तक चली 
संघर्ष गाथा का
हो गया अंत
प्रफुल्लित हुआ
दसों दिशाएं दिग दिगंत 
36 आध्यात्मिक 
परम्पराओं के पीठाधीश्वर
ध्वज पताकाओं से सजी
उत्साह और राम नाम
के उद्घोष के साथ
राम जन्मभूमि परिसर
जीवन्त हो उठी
त्रेतायुग की
ऋषिकुल परम्परा दिखी
धन्य हो गई 
भगवान राम की नगरी 
अयोध्या।
              ****
    ©#कामेश्वर_निरंकुश

जय_श्री_राम_जय_जय_राम



सबके हैं राम सब में हैं राम
घट घट के बासी हैं श्रीराम।
सिया राममय सब जग जानी
सबके पूर्ण होंगे सब काम।।

492  वर्ष  तक  हुए  संघर्ष 
का,  आज  हो  रहा  है अंत।
दसो  दिशाएं  झूम  उठी  हैं
हर्षित  हुआ है  दिग  दिगंत।

हुआ था युद्ध 76 बार ,
लाखों श्रद्धालुओं का बलिदान।
तब आन्दोलन  हुईं  पूर्ण
श्री राम भक्ति का है परिणाम।

मन्दिर के चले आन्दोलन में
अर्पण भी था  तर्पण भी था।
बलिदान और संकल्प के साथ
संघर्ष, त्याग, समर्पण भी था।

वर्षों से टाट और टेंट तले  
रह  रहे थे हमारे   राम लला।
सदियों चल रहे व्यतिक्रम से
रामजन्म भूमि मुक्त हुई भला।

रामकोट में हुआ भूमि पूजन
जहां बिराजमान थे रामलला।
अभिजीत मुहूर्त में मंदिर की
रखी  गई वहां आधार शिला ।

अयोध्या  में  भूमि  पूजन से
नए  युग  की  हुईं  शुरुआत।
जहां बिराजमान थे रामलला
अब जाकर वह हुआ समाप्त।

प्रधान मंत्री की अगवानी में
कल जाकर हुआ हर्ष उत्कर्ष।
जय  श्री  राम  जय  जय  राम
जयघोष से गूंजा अयोध्या सहर्ष।।
                 *****
       #कामेश्वर_निरंकुश

Sunday, 9 August 2020

नहीं भूल सकता

नहीं भूल सकता

ये खिलखिलाती हंसी
चेहरे पर खुशी
खुले हुए केश
मदमस्त सौन्दर्य
आंखों की गहराई
गुलाबी गाल
चूड़ियों की खनक
हर अंग में उमंग
खिली हुई जवानी
मेरे हर आयोजन की दिवानी
हृदय की विशाल
हर वक्त जाे रखे खयाल
सच कहता हूं
उसे कभी नहीं
भूल सकता।
      ***

Monday, 1 June 2020

विवशता



नई नवेली दुल्हिन
सोच रही थी
पति के साथ 
मेट्रो फूलों का शहर
हाईटेक नगरी
बेंगलुरु आकर।

प्रतिदिन वह देखती 
सुबह निकल पड़ता  
हर मजदूर दिहाड़ी पर....
किसी साधारण कपड़े में
और मेरा पति
सूट बूट टाई पहन कर।

किसी के कंधे पे गमछा था....
पर मेरे पति के लैपटॉप.....

गमछे वाला 6 बजे तक घर आ  जाता
laptop वाले का 
देर रात तक भी पता नही....
क्या पढ़ने लिखने के बाद
नौकरी में ऐसा ही होता है
प्रतिदिन.....

हर सप्ताह के
कार्य दिवस के
अंत दिन शुक्रवार को
देर रात्रि चढ़ने पर लौटना
और शनिवार या रविवार की रात्रि
दोस्तों के साथ मस्ती में बिताना
जीवनसंगिनी को साथ न ले जाना
झेलते हुए लाचार थी वह .....

हर दिन का यही हाल था
दुल्हिन का मन बेहाल था
वह विवश थी
भीतर ही भीतर पिस रही थी
पति को छोड़कर वह
जाना भी नहीं चाहती थी
.....अवसर भी नहीं मिल रहा था 
साथ साथ रहने का उसे .......।
              ★★★
  ©  #कामेश्वर_निरंकुश

विडम्बना



देश आजाद
हम भी आजाद
लोकतंत्र की 
सबसे बड़ी विडंबना
सिर्फ शासक वर्ग के लिए ही
योग्यता का कोई पैमाना नहीं
कौन किस विभाग का 
मंत्री बन जायेगा
कोई ठिकाना नहीं
कई ऐसे भी चुने गए हैं उम्मीदवार 
जिन्हें विषय विशेष में दक्षता है अपार
विषय प्रवीण नेता को 
अगर उसी विषय के अनुरूप 
मंत्री बनाया जाएगा।
देश का भाग्य स्वतः निखर जाएगा।।
      © #कामेश्वर_निरंकुश

तुम बस तुम हो



     यह सच है
     अकाट्य सच है
     सर्व विदित है
     तुम सर्वरूपा हो
     अनुपा हो
     कामिनी
     प्रिया
     सखी
     बहन
     बेटी
     मातृ स्वरूपा हो
     तुम्हीं शक्ति
     जीवन की मधुम यी
     अनुरक्ती हो
     तुम्हीं जननी
     तुम्हीं पालिका   
     गुरू मां
     ससृक्षा
     आशक्त अनाशक्ति
     तुम्हीं प्रीति रसधार
     जिंदगी का श्रृंगार
     उपवन की बहार हो
     नाचती मोहिनी उर्जा हो
     आनंदरूपा
     मुक्तिद्वार हो
      हे पूज्या मातृ शक्ति
     तुम्हीं दुर्गा 
     तुम्हीं काली
     तुम्हीं सरस्वती
     हम सभी की
     लगी रहे भक्ति
     हे   माते !
     हम संतानों का 
     कृतज्ञ नमन
     बारम्बार स्वीकार हो।
               °°°°°