Saturday, 24 October 2015

झारखण्ड का भविष्य

अजब गज़ब दिखा
झारखण्ड का सियासी इतिहास
इन पंद्रह वर्षों में ।
सियासती गलियारों में
विरोधी जानलेवा प्रवृतियों में
प्रेम और दोस्ती
एक तरफ भाजपा
दूसरी तरफ 
कांग्रेस, झामुमो और राजद की तिकड़ी ने
यहॉं के लोगों को भरमाया है 
अपना उल्लू सीधा करने के ख्याल से
आजसू और जेवीएम आया है
वाम दल और निर्दलीय भी
इधर उधर मुँह मारते आए हैं
मेरा भी वजूद है
सबको समझाएं हैं
बारह महीने में 
तिन नस्लों की सरकार
दलों की राजनीति में
विकास का बंटाधार
सियासी जुदाई और मिलन की बेमिसाल दास्तानें रंग भरती रही
जनता हाँथ मलती रही ।
इन दलों के दलदल में 
भोली भाली जनता चकराई है
झारखण्ड का क्या भविष्य होगा
समझ नही पायी है।
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Sunday, 31 August 2014

नामकरण



बहुत अच्छा होता 
शहीदों 
स्वत्रंतता सेनानियों 
राष्ट्र - प्रेमियों के नाम 
संस्थान 
योजना 
प्रतिष्ठान 
परिवहन के नाम रखा जाता 
उनकी कुर्बानियों का ऋण देश चुकाता 
हर जगह उनकी गाथा गया जाता  

मोह का मायाजाल



नेताओं द्वारा
नेताओं के परिवार के
सदस्यों के नाम
सड़क प्रतिष्ठान योजना का नामकरण
उनकी समाज में लोकप्रियता दर्शाना
अपने परिवार के सदस्यों का नाम बढ़ाना
साफ साफ दर्शाता है
मोह का मायाजाल
राष्ट्रीयता को झुठलाता है

Tuesday, 26 August 2014

क्यों करें बात

क्यों करे हम अनर्गल बात
दशकों से हम कर रहें हैं
पाक के साथ
सिर्फ बात ही बात

यह कथन नहीं है अकस्मात 
मात्र कहने को है
एक जिस्म और दो जान
उसकी करामातों से सभी है परेशान
साफ़ साफ़ नजर आता है
दुराभाव अलगाव
सरकारों में टकराव ही टकराव
आजादी के बाद से ही
टकराव और वार्ता
साथ साथ
तब क्यों करें बात 
यह विश्व जान गया है
पाकिस्तानी सेना
रिश्ते नहीं सुधरने देगी
पाकिस्तान
छोटा देश छोटा दिल
भारत
बड़ा देश बड़ा दिल
जहा सभी रहतें हैं हिल-मिल
वह फिर करेगा आघात

क्यों करे हम अनर्गल बात
दशकों से हम कर रहें हैं
पाक के साथ
सिर्फ बात ही बात 

Wednesday, 18 June 2014

गर्मीं और प्रेयसी

  
दिन भर की चुभती गर्मी 
चिलचिलाती धूप 
कहर बरसाती तपिश में 
राहत की बूंदे पड़ी 
चुलबुली बंद दरवाजे खोल 
घर से निकली 
हल्की वारिस से 
तपती शाम में ठंढक घुली 
फ़िज़ा भी बदली 
निग़ाहें चाहती थी 
तपती बहती हवा में भी 
चुलबुली 
संगमरमरी 
जानेमन को देखना 
देखते ही मिलती है 
शांति 
तरावट 
राहत 
वशर्ते कि 
वह प्रेमिका हो 
प्रेयसी हो 
प्यारी हो 
न्यारी हो । 

Monday, 16 June 2014

दोस्ती का परचम

टकराव और हिंसामुक्त वातावरण से
संबंधो को आगे बढ़ाएं
वैमनस्य
कटुता
कूटनीति छोड़
मधुर  व्यवहार से
एकजुटता दिखाएं
यह मिशाल विश्व को
एक नया राह दिखाएगा
पड़ोसी देश से
आपसी दोस्ती का परचम
हर ओर लहराएगा।

सीमा और शांति

साड़ी, शॉल और खत
कहीं ला मत देवे आफ़त
इसमें छिपी तो नहीं है कूटनीति
फिर क्यों माहौल बिगाड़ने की
दिख रही है स्थिति
क्यों दागे जा रहे हैं
सीमाओं के सेक्टरों पर
भारी गोलाबारी मोर्टार
क्यों नहीं दिख रहा है
अपनापन, प्रेम, सौहार्द्य
क्यों  करते हो बार बार
सीज फायर  का उल्लंघन
तेरी हरकतों से कैसे विश्वास करें जन गण
फिर भी याद दिलाता हूँ
सीमा पर शांति
भारत की प्रमुख प्राथमिकता है
यह आदत अगर सुधर जाय
तब ही भारत से सच्ची मित्रता है।