Saturday, 16 November 2013

सचिन...सचिन

सचिन सचिन 

क्रिकेट का बादशाह
क्रिकेट का गौरव
क्रिकेट का विजेता
क्रिकेट का प्रणेता
क्रिकेट खेल के
ड्रेस में  दस नम्बरी
अर्ध शतक बनाने में
शतक जमाने में
रानों की संख्या बढ़ाने में
मैन ऑफ़ द मैच में
मैन ऑफ़ द सीरीज में
अनेक में
सब में एक नम्बरी
क्रिकेट का शिखर पुरुष
क्रिकेट का सिकंदर
दो सउआ खेल खेलते समय
वानखड़े स्टेडियम के अंदर
अपने धरती की  माटी को
सर पर लगाकर
खेल कि महत्ता बता कर
१६ नवंबर २०१३ के दिन
सजल नयनों से वक्तव्य देकर
विदा हो गया
भारत रत्न से अलंकृत होने वाले
क्रिकेट खेल के धुरंधर
क्रिकेट के भगवान्
हमें सचिन पर है अभिमान
हर क्षण याद रहेगा
अश्रुपूरित नयनों के साथ
तुम्हारी अस्मरणीय विदाई
सचिन बधाई बधाई बधाई । ।

Thursday, 14 November 2013

शुभकामनायें सचिन

शुभकामनायें सचिन

खेल जीवन के इतिहास में
दो सौवां खेल खेलकर
चौहत्तर रन की बढ़त
अर्जून जैसा लक्ष्यधारी
हाथ में
बल्ला में अतुलित बल
क्रिकेट का दीवाना
नज़ाकत के साथ ताकत
चौबीस साल तक
खुशियों से झोली भरनेवाला
सचिन तेंदुलकर
अलविदा कहकर चला गया
खेल में आई यह रिक्तता
कैसे होगी पूर्णिता
पूरा भारत यह सोंचता है
खेल पर कौन रख पायेगा अंकुश
शुभकामनाएँ प्रेषित करता है
खेल प्रेमी
निरंकुश ।                                                                                                

सचिन तेंदुलकर सलाम

रजनी तेंदुलकर का लाड़ला
क्रिकेट का भगवान
मास्टर ब्लास्टर
खेल के मैदान का सिकन्दर
क्रिकेट खिलाडियों का प्रणेता
विश्व का चहेता
अपना दो सौवां खेल खेलकर
खेल के दिन
भारत बंद की स्थिति
सुखद आनंद की अनुभूति
क्रिकेट खेल में
भारत को शिखर तक पहुंचानेवाले
लोकप्रियता की परिकाष्ठा
खेल को अलविदा कहनेवाले
स्वर्णाक्षर में इतिहास गढ़नेवाले
सचिन तेंदुलकर
झारखण्ड हिन्दी साहित्य विचार मंच के
समस्त सदस्यों का
सलाम । 

Wednesday, 13 November 2013

अपने शहर की सड़क


नई चमचमाती काली सड़क पर
रात पैदल चलते हुए
अनायास याद आता है
अपने शहर का
लाल लाल मोरम से बना
 टेढ़ी मेढ़ी वह सड़क ।

दिन बीत गए
बरसों गुजर गए
उस समय की सड़क में
एक नई रवानगी थी
अपनापन था
भले ही वह आज की तरह
चिकनी फिसलनवाली नहीं थी
खुरदरी थी
पर प्रिय थी ।

समय के साथ साथ
वह काली हो गई
पसर गयी
और चौड़ी हो गयी
वर्षों पहले शहर के राहगीरों ने
बसाया था छोटा सा
अपना एक संसार
नुक्कड़ पर दोस्तों से मुलाकात
झोपड़ीनुमा दूकान पर
चाय पिलाती शुक्राइन
बाल बनाने वाला कलिया हजाम
कपडा धोकर लोहा करता रफ़ीक
दोने में धुसका चटनी खिलाती सोमरी
कैरम बोर्ड जमाते वीरू भाई
साइकिल मरम्मत करता भोला
बुक स्टाल वाले इंदु भाई
और भी न जाने कितने जाने अनजाने
सभी मिले-जुले  सुख दुःख में ।

अब दुनिया कितनी बदल गयी
अनजाना लग रहा है सुब कुछ
चौड़ी सड़क पर
कंक्रीट के बने
अट्टालिकाओं प्रतिष्ठानों
मॉलों के बाजारों ने
दूर कर दिया सभी को
एक दूसरे से
हम टूट गए
छूट गए
विकास के नाम पर । 

मै और मेरा शहर

मैं छोटा था
शहर भी छोटा था
इसलिए सुंदर था
शांत था
रमणीय था
और  अलग भी
दूसरे अन्य शहरों से

मैं बड़ा होगया
शहर भी बड़ा हो गया
फैल गया
मेरी तरह ख़त्म हो गयी
उसकी भी शांति

चंचलता शोखपन
रवानगी दीवानगी
मेरी नष्ट हो गयी
नष्ट हो गयी है
शहर की भी सुंदरता  
दफन हो गयी है
इसकी भी  इंसानियत
यही है हकीकत

याद आ गयी
बहुत पहले कही गयी बातें
छोटी चीज़ों  में छिपा रहता है
इस तरह उनका बड़प्पन
कि  बड़ी चीज़ें
बहुत छोटी हो जाती हैं
उनके सामने

बड़ा होना खल गया
मुझे भी और
अपने शहर रांची को भी ।


Sunday, 10 November 2013

गायिका रेश्मा

सितारों को सरहदें कभी
अलग कर सकती नहीं
उसकी धड़कनें हर दिल में सुनायी देती है
'लम्बी जुदाई ' गाने वाली मशहूर गायिका
हम सबसे जुदा हो गयी
पाकिस्तान के सबसे बड़े नागरिक सम्मान
सितारा-ए-इम्तियाज़ से नवाज़ी गयी
हिंदुस्तान के गीत प्रेमियों की चहेती
पकिस्तान की आंखों का तारा
जीवन और मृत्यु से लड़ती हुई
सदा के लिए चली गयी
बीकानेर राजस्थान के
बंजारा परिवार में जन्मी
रेश्मा की  रेशमी आवाज़
खामोश हो गयी
अब भी सुनायी पड़ती है
'दमादम मस्त कलंदर'
'हवो रब्बा ' नहीं लगदा दिल मेरा'
'सुन चरखे दी मिटटी मिटटी '
'मैं चोरी चोरी '
'अंखियों नू रहने दे'
'अँखियाँ दे कोल कोल '
सरहदी सीमाओं को मिटाने वाली
सबके दिलों में बसने वाली
मशहूर गायिका रेश्मा
अलविदा। …  । । 


 

श्रद्धांजलि - राजेंद्र यादव

'हंस' को अमृत रुपी दूध पिलाने वाला 
हिंदी साहित्य का चितेरा
सारे बंधनों को तोड़कर
सदा के लिए चला गया
 हिंदी साहित्याकाश के देदीप्यमान  नक्षत्रों में
स्थायी स्थान उसने बना लिया
हिंदी के वृक्ष पर
कांव कांव कर रहे कव्वुओ में से
प्रेमचंद के हंस को
पुनर्जीवित करने वाले की कमी को
कौन भर पायेगा
तुम तो चले गए
सदा के लिए मौन हो गए
परन्तु 'प्रेत बोलते हैं'
'सारा आकाश ' विद्यमान है
'अनदेखे अनजान पुल ' पर
'शह और सात ' प्रमुख उपन्यास संग
'एक इंच मुस्कान' दृष्टव्य है
हिंदी साहित्य में नयी कहानी शुरुआत करने वाले
महामनीषी !
साहित्यकार!!
राजेंद्र यादव !!!
श्रद्धा सुमन अर्पित
शत शत नमन ।