Sunday, 10 November 2013

संकल्प

दीपावली के शुभ  अवसर पर

पाटाखों के बदले

अपने मन के संकुचित भाव

किसी के प्रति द्वेष

काम क्रोध लोभ मोह

मन से हटाकर

मत्सर को जलाकर

स्नेह भाव के दीपक जलाएं

अज्ञान के अन्धकार को हटाएं

अंधियारी गलियों से निकलकर

उजास भरे आसमान की  ओर सफ़र कराएं

एक दीया 

इन्ही संकल्पों के साथ जलाएं ।
 

Tuesday, 5 November 2013

चित्रांश

चित्रगुप्त पूजा के शुभ अवसर पर 
सभी चित्रांश 
अपने मन के संकुचित भाव 
किसी के प्रति द्वेष 
मत्सर को जला कर 
कलम कागज दवात को 
पूजा के थाली में सजा कर  
भाई-द्विज के दिन बहिन के घर जाएं  
स्नेह भाव के दीपक जलाएं 
चित्रगुप्त के वंशज है हम 
अज्ञान के अन्धकार को हटाएं 
जीवन की अंधियारी गलियों से निकल कर 
उजास भरे आसमान की ओर सफर कराएं 
कलम उठा कर एक दीया 
इन्ही संकल्पो के साथ जलाएं 

ज्योति पर्व

ज्योति पर्व  यह मगलमय हो।
सृष्टि जगत पर सदा सदय हो।

संघर्षो की कठिन राह हो
या हो सघन अँधेरा ,
साहस सम्बल धीरज धर्म
हमसे कभी न क्षय हो।

कर्म के बल बढें सभी
उन्नति के पथ पर,
विघ्न बढाओं से जूझें
लेकिन सदा विजय हो।

दीप प्रज्वलित हो सर्वत्र
मिटे घोर अँधेरा,
हँसी खुशी हो हर प्राणी में
यह सदैव सुखमय हो।

रोग द्वेष भय मुक्त धरा हो
सुभ संचय हो ,
दुख दरिद्र विकार मिटे
इन सब का क्षय हो।

बुद्धि विवेक ज्ञान यश हो
नव ऊर्जा हो सिंचित,
ज्योति पर्व  पर धरा
समूची ज्योतिर्मय हो।

Saturday, 2 November 2013

दीया जलाएं

महंगाई की आंच ने
रखा नहीं काबिल
फिर भी दीया उठाएं
अपनापन के घी में
प्रेम कि बाती डुबोएं
दीया जलाएं।

खुशियों का त्यौहार
घोलेगा रिश्तों में मिठास
दिवाली की झोली में
खुशियाँ ही खुशियाँ हैं
मन के अंधियारे को मिटाएं
दीया जलाएं।

'इट ड्रिंक एंड मेरी'
त्यौहार नहीं है
अपनी संस्कृति को याद कर
आनंद और मौज मस्ती
अपने परिवार में लाएं
दीया जलाएं।

अमावस का अंधेरा छँटेगा
उजाले की बरसात होगी
रौशनी की जगमग खिलखिलाहट में
दीप की पंक्तियों में जुड़कर
दीया जलाएं।

रौशनी बिखेरती मोमबत्तियाँ
रंग-बिरंगे बल्बों की लड़ियाँ
घर दरवाजे पर सजे रंगोलियाँ
इन सब में भागीदारी निभाएं
दीया जलाएं।

लक्ष्मी प्राप्ति हेतु बुद्धि
गणेश जी प्रदान करें
धनवान बनने की राह में विघ्न बाधाएं
विघ्न विनायक हटाएं
लक्ष्मी गणेश की मूर्ति के समक्ष
श्रद्धा लगन के  साथ
दीया जलाएं।



दीपक

समय  के   साथ   बदले   हैं  दीपक।
नहले   पे   आज  दहले   हैं   दीपक।।
फैशन  युग  में    बन   गए  मॉडर्न।
दीपावली  में   ये  बिरले  हैं  दीपक।।
रौशनी पर फैली महंगाई की छाया।
फिरभी   भाता   पहले    है   दीपक।।
 बदलते समय  में ग्राहको के लिए।
अपना   स्वरुप   बदले   हैं   दीपक।।
साथी बनाकर कैंडिल  रंगीन बल्बें।
सबमे टिमटिमाता पहले है दीपक।।

Friday, 1 November 2013

ज्योतिपर्व की शुभकामनाएं

१.
संदेह के
अँधेरे को
हटाएं
रौशनी के इस त्यौहार में
एक दीप
विश्वास के साथ जलाएं
दीपावली की शुभकामनाएं।

२.
इस दिवाली में
किसी और के चेहरे पर
मुस्कान लाएं
उसकी जिन्दगी को रोशनी से भर दें
हँसें हँसाऐं
मुस्कराते हुए दीप जलाएं
दीपोत्सव की शुभकामनाएं।

Thursday, 31 October 2013

श्रद्धांजलि राजेन्द्र यादव

'हंस' को अमृत रूपी दूध पिलानेवाला 
हिंदी साहित्य का चितेरा 
सारे बंधनों को तोड़ कर 
सदा के लिए चला गया। 
हिंदी साहित्याकाश के देदीप्यमान  नक्षत्रो में 
स्थायी स्थान उसने बना लिया।
हिंदी के वृक्ष पर काँव काँव कर रहे कौवों में से
अब प्रेमचंद्र के 'हंस' को 
पुनर्जीवित करने वाले की कमी को कोन भर पाएगा।
तुम तो चले गए 
सदा के लिए मौन हो गए, परन्तु 
'प्रेत बोलते हैं'
'सारा आकाश' विद्यमान है 
'अनदेखे अनजान पुल' पर 
'शह और सात प्रमुख उपन्यास' संग 
'एक इंच मुस्कान' दृष्टव्य है। 
हिंदी साहित्य में
नयी कहानी की शुरुवात करनेवाले 
महामनीषी !
साहित्यकार !!
राजेंद्र यादव!!!
श्रद्धा-सुमन अर्पित 
शत् शत् नमन